सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सागरिका के दैनिक आयोजनों के धन्यवाद ज्ञापन - सागरिका

सागरिका के दैनिक कार्यक्रमों में धन्यवाद ज्ञापन देने वालों के नाम १- श्रीमती श्वेता पंकज झा २- श्रीमती  मोनिका समीर झा ३ - श्रीमती रुचि झा ४ श्रीमती निष्ठा ठाकुर ५ -श्रीमती भावना संजीव ठाकुर ६- श्रीमती सुभाषिणी झा धन्ययवा । मैं सोच रही थी हर सदस्य इसमे हिस्सा लें इसी बहाने सभी लोगों से आप रूबरू होंगे क्रमशः अपने नाम भेजिए अभी ओ फिलहाल श्वेता जी, मोनीकजी, रुचि जी और निष्ठा जी ने बहुत अच्छे से अपनी जिम्मेदारी निभाई उम्मीद है हमारा यह क्रम ऐसे ही चलता रहेगा इसके लिए सुबह यदि आपलोग अपना नाम फोटो परिचय देंगे तो और भी मजा आएगा आपलोग मेरे नंबर 9827128555 पर अपने नाम जुड़वाते रहिए  धन्यवाद आपलोग भी अपने नाम लिखवाते जाइये धन्यवाद ज्ञापन के लिए      धन्यवाद 

नववें दिन

नववें दिन माँ सिद्दी दात्री को कत्थे या चटक लाल रंग की चुनरी चढ़ाते है ये माता हमें समस्त सुखों को प्रदान देने में सिद्धियाँ प्रदान करती है अनहोनी से बचने के लिये माता को अनार का भोग लगाना चाहिये

आठवें दिन

आठवें दिन महागौरी को अन्य घन देने वाली अन्नपूर्ण माता कहते है उन्हे नारियल, अनार का भोग लगता है। माता की पूजा संतान के सुख सौभाग्य और स्वस्थ दिर्घायु की कामना से की जाती है। माँ माहागौरी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं। स्त्रियां माता को लाल रंग के वस्त्र फल, फूल, भोग इत्यादि चढ़ाते हैं तथा कन्या पूजन करते हैं। सिंघाड़े के आटे का केक सामग्री :- 1 1/2 कटोरी सिंघाड़ा आटा 1 कटोरी दूध पाउडर 1 कटोरी शुद्ध घी 1 कटोरी पिसी शक्कर  1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर 1/2 छोटा चम्मच खाने का सोडा 1/2 गिलास गर्म दूध 1/2 कटोरी कूटी हुई बादाम और काजू विधि :- पहले घी और शक्कर को अच्छी तरह से फेट लें फिर सिंघाड़े आटे, दूध पाउडर, बेकिंग पाउडर, खाने का सोडा, को मिक्स करके छान लीजिए घी और शक्कर के मिश्रण में सिंघाड़ा आटा दूध पाउडर बेकिंग पाउडर खाने के सोडे के मिश्रण को डालिए फिर गर्म दूध डालकर अच्छी तरह फेंट जब बबल्स बनने लगे केक के मिश्रण में तो केक के टीम में घी लगाकर थोड़ा सा सिंघाड़े आटे की डस्टिन कीजिए फिर उसमें केक का मिश्रण डालकर फिर केक के मिश्रण में कुटी हुई काजू बदाम डाल दीजिए ऊपर से और ...

सातवां दिन

 दिन काल रात्रि माता को आसमानी रंग की चुनरी चढ़ता है और जो हमारे अंदर नाकारात्मक विचार आता है उसको दूर करने के लिये माता को गुड और नीबू का भोग लगता है

छठवाँ दिन

छटवें दिन  कात्यायनी माता को हरे रंग की चुनरी चढ़ता है। और माता को प्रसन्न करने के लिये शहद और पान का भोग लगाते है।  माँ कात्यायनी पार्वती माता की शक्ति से उतपन्न हुई हैं।माँ कात्यायनी को आसुरि शक्तियों का नाश करने वाली कहा गया है। माता भक्तवत्सल होती हैं इनकी आराधना करने से भक्त भय मुक्त होते हैं।  स्कंदपुराण में उल्लेख मिलता है कि माँ कात्यायनी भगवान ब्रम्हा, विष्णु, महेश की  नैसर्गिक शक्ति से उतपन्न हुईं और माँ पार्वती द्वारा  दिए गए सिंघ पर आरूढ़ हो महिषासुर का वध किया इसकारण माँ कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी भी कहते हैं। माँ कात्यायनी दोनों भंवों के बीच स्थित आज्ञा चक्र को नियंत्रित करती हैं। ध्यान में इसी आज्ञा चक्र को जागृत किया जाता है अतःयोग की विशिष्ट यवस्था ध्यान है।

पांचवा दिन

पाचवें दिन माँ स्कन्द माता को गुलाबी चुनरी चढ़ती है शारीरिक कष्ट निवारण के लिये केला का भोग लगता है स्कंदमाता के रूप में माँ पार्वती के माता रूप की पूजा की जाती है। स्कंद भगवान कार्तिकेय का नाम है माता ने गोद मे कार्तिकेय भगवान यानी अपने बड़े पुत्र को लिया हुआ है । माता इस रूप में सौम्य रूप में होती हैं स्कंदमाता की चार भुजाएं होती हैं वे कमल के फूल पर विराजित हैं तथा सिंह उनका वाहन है माता कीपूजा बच्चों की दिर्घायु, आरोग्य के लिए की जाती है। श्रीमती ज्योति झा जी द्वारा बनाए गए फलाहारी व्यंजन..... *राजा पराठा -* आवश्यक सामग्री-दो कटोरी आटा एक चौथाई कटोरी काजू।  3---4 दाने काली मिर्च ं दोनों थोड़े  दर्  दरा पिसा हुआ।। एक चौथाई चम्मच सेंधा नमक घी या तेल । आटा गुदंने के लिए पानी।  विधि---आटा में सेंधा नमक डालकर आटा को अच्छे से    गुथ  लेंगे। इसके बाद तीन या चार गोले बनाकर रख लेंगे और फिर जिस तरह से आलू के पराठे बनाते हैं ठीक वैसे ही काजू और  काली मिर्च का पिसा हुआ मिक्सचर को भरकर पराठे बनाना है ।इसे आप तिकोना या गोल जैसा आप। चा...

चैथा दिन

   चौथे दिन कृष्मांडा देवी की पूजा होती है उस दिन माता को भूरे रंग की चुनरी चढ़ती है। निर्णय और मानसिक शांति के लिये माल पुवा का भोग लगाना चाहिये माता की उपासना करने पर घर में उनकी कृपा बनी रहती है और निर्णय लेने की माता से शक्ति प्राप्त होती है। माता की धुर मुस्कान वाली छवि से ही ब्रम्हांड की रचना हुई माता को सृष्टि की रचयिता भी कहते हैं। माता की भक्ति से अनहद चक्र की जागृति होती है अतः जो अपनी परालौकिक शक्ति को जागृत करना चाहते हैं तथा जीवन मे सुख की कामना करते हैं उन्हें म कुष्मांडा की सच्चे मन से आराधना करनी चाहिए। माँ कुष्मांडा की सौम्य छवि होती है। माता को लाल फूल चढ़ाते हैं माता की पूजा हरे आसन में बैठ कर करना चाहिए। तथा माता छह भुजाओं से युक्त छवि लिए होती हैं उनकी भुजाओं में कमंडल, धनुष बाण, शंख,अमृत कलश होते हैं तथा गले मे सफेद जपमाला पहने होती हैं जो सभी सिद्धियों को देने वाली होती हैं माता शेरनी की सवारी करती हैं। सिंघाड़े आटे के मालपुए  सामग्री:-  4 सर्विंग 1 कटोरी सिघाडे का आटा आवश्यकतानुसार दूध 1/2 कप मावा 1 कप चीनी 1/2 कप पानी 2...