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जिउतिया की पूजन विधि और कथा - श्रीमती आशा ठाकुर,

🙏🙏श्री गणेशाय नमः  ,, ज्युतिया ,, यह त्यौहार क्वांर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी को अपने बच्चे की दीर्घायु , तेजस्वी , और स्वस्थ होने की कामना करते हुए माताएं इस दिन निर्जला व्रत करती है। विधि ज्युतिया के पहले दिन किचन शाम को साफ सुथरा कर पितरों के लिए भोजन बनाया जाता है।  शाम को तरोई या कुम्हड़ा के पत्ते पर  पितराईन को दिया जाता है। उसके पहले चिल , सियारिन , जुट वाहन , कपूर बती , सुहाग बती , पाखर का झाड़ , को सभी चींजे खाने का बना हुआ रहता है। फल मिठाई दूध , दही , घी शक्कर मिला कर (मिक्स ) करके ओडगन दिया जाता है। तत् पश्चात जो इस दुनिया में नही है। उन पितराईन के नाम लेकर उस पत्ते पर रख कर उन्हें दिया जाता है। नाम लेकर   *दूसरे दिन* सुबह स्नान कर प्रसाद बनाए अठवाई , बिना नमक का बड़ा  शाम के समय पूजा करें   *पूजा की तैयारी*  चंदन , रोरी कुमकुम गुलाल , फूल , दूबी , अक्षत , तिल , कपूर आरती , घूप दीप  भीगा मटर , खीरा या फिर केला ज्युतिया लपेटने के लिए  गौर साठ का डिब्बा  गौरी गणेश कलश  चौक पूरे , गौरी ...