श्री गणेशाय नमः मैं पूजा की सारी विधि की जानकारी दी हूँ। पर एक अंतिम संस्कार जो पूजा के अंत में की जाती है। वह है। राह बुझाना यह जरूरी होता है। क्यों बुझाया जाता है। इसका एक विशिष्ट और पारंपरिक अनुष्ठान है। यह परम्परा विशेष वर्ग में देखने को हमें मिलता है। विशेषकर हमारे मिथिलांचल एवं उत्तर प्रदेश में यह रिवाज किया जाता है। राह बुझाना का अर्थ और प्रतीक राह बुझाना शब्द सीधा संबंध यमराज के मार्ग को शांत करना अर्थात् हम जब भी बड़े पूजा करते है। जैसे तीजा आदि में राह बुझाते है। तो किसी भी देवी देवता को शांत करना होता है। जैसे की जब हम वट वृक्ष की पूजा करते है तो जैसे सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राणों को यम राज से वापस लेकर लौट रही थी। तो उसी मार्ग से वापसी की थी। सत्यवान को यमराज उसी मार्ग से लेकर जा रहे थे। इसी कारण नौ या सात पत्थर नवेली या सप्तर्षि के प्रतीक माने जाते है। उनकी पूजा की जाती है। क्यों की दुर्गम मार्ग की बाधाओं को दर्शाते है । जिन्हें सावित्री ने पार किया ऐसा दुर्गम मार्ग हमारे जीवन में ना आये यदि आये तो शांति से ...