श्री गणेशाय नमः मैं पूजा की सारी विधि की जानकारी दी हूँ। पर एक अंतिम संस्कार जो पूजा के अंत में की जाती है। वह है। राह बुझाना यह जरूरी होता है। क्यों बुझाया जाता है। इसका एक विशिष्ट और पारंपरिक अनुष्ठान है। यह परम्परा विशेष वर्ग में देखने को हमें मिलता है। विशेषकर हमारे मिथिलांचल एवं उत्तर प्रदेश में यह रिवाज किया जाता है। राह बुझाना का अर्थ और प्रतीक राह बुझाना शब्द सीधा संबंध यमराज के मार्ग को शांत करना अर्थात् हम जब भी बड़े पूजा करते है। जैसे तीजा आदि में राह बुझाते है। तो किसी भी देवी देवता को शांत करना होता है। जैसे की जब हम वट वृक्ष की पूजा करते है तो जैसे सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राणों को यम राज से वापस लेकर लौट रही थी। तो उसी मार्ग से वापसी की थी। सत्यवान को यमराज उसी मार्ग से लेकर जा रहे थे। इसी कारण नौ या सात पत्थर नवेली या सप्तर्षि के प्रतीक माने जाते है। उनकी पूजा की जाती है। क्यों की दुर्गम मार्ग की बाधाओं को दर्शाते है । जिन्हें सावित्री ने पार किया ऐसा दुर्गम मार्ग हमारे जीवन में ना आये यदि आये तो शांति से ...
श्री गणेशाय नमः या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण ' संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः जय माता दी 🙏🙏 आज मैं नवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर आपको नवरात्रि इस वर्ष कितने दिन की है। घट स्थापना का मूहर्त कब है। एवं किस दिन कौन सी देवी को क्या भोग लगना चाहिए एवं हवन समाग्री, उनके महत्व बताने की कोशिश कर रही हूँ । 19, मार्च से वसन्त नवरात्रि आरम्भ हो रही है ध्वजा रोहण , कलश स्थापना प्रातः काल6.52 मिनट से लेकर प्रातः काल7.43 मिनट में है। उसके बाद दोपहर अभिजीत मुहूर्त 12.5 मिनट से लेकर दोपहर 12.53 मिनट पर है। इस नवरात्र में तिथियों को लेकर कोई संशय नहीं है। प्रायः देखा जाता है। की आमतोर पर दो तिथियां एक ही दिन पड़ती हैं। तो नवरात्र आठ दिन का ही होता है। यदि तिथि बढ़ जाए तो ऐसे स्थिती में नवरात्र दस दिन का होता है। इस वर्ष 2026, में नवरात्र प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि सभी क्रम बद्ध है। इसलिए आपको माता की आराधना के लिए पूरे नौ दिन प्राप्त हो रहे हैं। जानते है नौ दिनों में तिथि एवं पूजा के साथ ही माता का स्वरूप दिन - तिथि - ...