श्री गणेशाय नमः
मैं पूजा की सारी विधि की जानकारी दी हूँ। पर एक अंतिम संस्कार जो पूजा के अंत में की जाती है।
वह है। राह बुझाना
यह जरूरी होता है।
क्यों बुझाया जाता है।
इसका एक विशिष्ट और पारंपरिक अनुष्ठान है।
यह परम्परा विशेष वर्ग में देखने को हमें मिलता है। विशेषकर हमारे मिथिलांचल एवं उत्तर प्रदेश में यह रिवाज किया जाता है।
राह बुझाना का अर्थ और प्रतीक
राह बुझाना शब्द सीधा संबंध यमराज के मार्ग को शांत करना अर्थात् हम जब भी बड़े पूजा करते है। जैसे तीजा आदि में राह बुझाते है। तो किसी भी देवी देवता को शांत करना होता है। जैसे की जब हम वट वृक्ष की पूजा करते है तो जैसे सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राणों को यम राज से वापस लेकर लौट रही थी। तो उसी मार्ग से वापसी की थी। सत्यवान को यमराज उसी मार्ग से लेकर जा रहे थे।
इसी कारण नौ या सात पत्थर नवेली या सप्तर्षि के प्रतीक माने जाते है। उनकी पूजा की जाती है। क्यों की दुर्गम मार्ग की बाधाओं को दर्शाते है । जिन्हें सावित्री ने पार किया
ऐसा दुर्गम मार्ग हमारे जीवन में ना आये यदि आये तो शांति से हम पार कर सकते है।
चौक मतलब शुभता का प्रतीक माना जाता है। फूल गौड़ा चौक देकर उसके ऊपर छोटे - छोटे पत्थर के कर्ण रखकर पूजा की जाती है। जल अपर्ण कर चंदन रोरी , कुमकुम गुलाब , धूप , दीप , भोग लगाकर
ऐसा करने का हमें यह संकेत मिलता है। की अब मृत्यु का मार्ग बंद होकर जीवन में सुख , सौभाग्य का मार्ग खुल गया है।
यह कारण भी है। राह बुझाने का यमराज की बिदाई, वट वृक्ष पर यम राज और सत्यवान सावित्री की पूजा होता है।
पूजा के बाद हम यमराज को सम्मानपूर्वक विदा एवं उनके क्रोध या नकरात्मक प्रभाव को घर की दहलीज से दूर रखने के लिए वृक्ष की कुछ दूरी में राह बुझाते है।
हम इसलिए करते है। क्योंकि हमारे पूर्वज पंडित जी थे। वह कर्मकाण्ड को बारीकियों से देखा जाता था। क्योंकि हम कुलीन घरानों के थे यही कारण है। की छोटी पूजा से लेकर बड़ी पूजा रीति रिवाजों , से करते आये है। और आज तक हम उन बुर्जुगों की बनायी गयी रीति रिवाज की परम्परा को निर्वाह आज भी कर रहे है। उनकी धरोहर को जीवित रखने का प्रयास कर रहे है।
लोग इसे आडम्बर मानते है। पर ये हमारी पूर्वजों की दी हुई संस्कृति है।
हमारी संस्कृति हमारी विरासत है। इसे हमें बचाना है। ना कि विरोध करना है।
अंत में हमें राह बुझाने के बाद अपने आंचल से हवा देकर जल से छिड़काव करना है।
कारण यह है। कि सावित्री अपनी बुद्धि और तप से मृत्यु के मार्ग को जीवन के मार्ग में बदल दिया है। यही कारण है। राह बुझाने का
बोलिए सत्यवान सावित्री माता की जय
आशा ठाकुर अम्लेश्वर
🙏🙏
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