श्री गणेशाय नमः
या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण ' संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
जय माता दी 🙏🙏
आज मैं नवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर आपको नवरात्रि इस वर्ष कितने दिन की है। घट स्थापना का मूहर्त कब है। एवं किस दिन कौन सी देवी को क्या भोग लगना चाहिए एवं हवन समाग्री, उनके महत्व बताने की कोशिश कर रही हूँ ।
19, मार्च से वसन्त नवरात्रि आरम्भ हो रही है
ध्वजा रोहण , कलश स्थापना प्रातः काल6.52 मिनट से लेकर प्रातः काल7.43 मिनट में है।
उसके बाद दोपहर अभिजीत मुहूर्त 12.5 मिनट से लेकर दोपहर 12.53 मिनट पर है।
इस नवरात्र में तिथियों को लेकर कोई संशय नहीं है। प्रायः देखा जाता है। की आमतोर पर दो तिथियां एक ही दिन पड़ती हैं। तो नवरात्र आठ दिन का ही होता है। यदि तिथि बढ़ जाए तो ऐसे स्थिती में नवरात्र दस दिन का होता है। इस वर्ष 2026, में नवरात्र प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि सभी क्रम बद्ध है। इसलिए आपको माता की आराधना के लिए पूरे नौ दिन प्राप्त हो रहे हैं।
जानते है नौ दिनों में तिथि एवं पूजा के साथ ही माता का स्वरूप
दिन - तिथि - माता का स्वरूप
19 तारीख प्रतिप्रदा - मां शैलपुत्री की पूजा , एवं घट स्थापना ,
20 तारीख - द्वितिया तिथि - मां ब्रम्हचारिणी की पूजा
21 तारीख - तृतीया तिथि - मां चंद्रघंटा की पूजा
22 तारीख चतुर्थी तिथि - मां कूष्मांड की पूजा
23 तारीख पंचमी तिथि - मां स्कंदमाता की पूजा
24 तारीख षष्टी तिथि - मां कात्यायनी की पूजा
25 तारीख सप्तमी तिथि - मां कालरात्रि की पूजा
26 तारीख अष्टमी तिथि- मां महागौरी की पूजा
27 तारीख नवमी तिथि - मां सिद्धिदात्री की पूजा एवं राम नवमी
हर दिन माता का स्वरूप की पूजा करें
यदि आप घर के मंदिर में पूजा करते है नवरात्र के समय तो इन पांच नियमों का पालन जरूर करें यह नियम कुछ इस तरह है। 👇
1, शुद्धिकरण
प्रातः काल सर्व प्रथम शौच से मुक्त होकर स्नान करें एवं लाल या पीला वस्त्र धारण करें पुरुष वर्ग गायत्री मंत्र पढ़कर नया जनेऊ धारण करें पीला या लाल रंग पूजा पाठ के लिए शुभ माना गया है। पूरे घर पर गंगा जल का छिड़काव करें एवं मंदिर स्थल को साफ करें भगवती की प्रतिमा या फोटों चौकी लगाकर उसके नीचे चावल आटा का घोल बनाकर अष्टदल बनाए सिन्दूर लगाए , गौरी गणेश कलश की स्थापना करें फूल गौड़ा चौक बनाए आमपत्ता लगा कर सजाए ।
2, दीप प्रज्जवलित -
यदि आप अखण्ड ज्योत जलाना चाहते है। तो लम्बी बत्तियों का उपयोग करें दीपक बुझे ना इस लिए एक हल्दी की गांठ लगा देवें तेल या शुद्ध घी अपने सामर्थ के अनुसार यूज़ करें । समय - समय पर बत्ती का ध्यान जरूर देवें बुझे ना
समान्य तौर पर पूजा करते है। तो दो बत्ती का दीपक जलाए एक बत्ती पितरों के लिए होता है। तो दो लम्बी बत्ती लगाएं कलश पर सर्व प्रथम यदि आप महिलाएं है। तो गौर साठ की पूजा पहले करें पश्चात् गौरी गणेश कलश की स्थापना एवं पूजा करें जो नौ दिन का नियम करते है। तो एक चौकी में लाल रंग का सूती वस्त्र बिछाए नवग्रह बनाए नव खड़ी हल्दी , नव सुपारी , नव पान के पत्ते अक्षत , एक रुपया का सिक्का नवग्रह में रखने के लिए तो कुल नव सिक्का रखें नारियल , एक , भोग धूप दीप आरती करें उसके बाद माता को जल से स्नान करें यदि प्रतिमा हो माता की दूध , दहि , धी , शहद,गुड , या शक्कर से स्नान करवें अर्थात् अभिषेक करें दूध से स्नान कराएं फिर जल ऐसे ही प्रत्येक बार पदार्थ चढ़ाएं तो जल जरूर चढ़ाए उसके बाद स्नान कर उन्हें साफ वस्त्र से साफ करें मूर्ति को चंदन , कुमकुम पुष्प , वस्त्र चढ़ाए उनकी पूजा करें धूप , दीप , आरती करें हर दिन उनको भोग लगाएं एवं क्षमा प्रार्थना करें कौन देवी को कोन सा भोग लगता है। नवरात्र के समय में इनकी जानकारी कुछ इस प्रकार हैं 👇,
प्रथम दिन - माता शैल पुत्री को गाय के दूध से बनी हुई शुद्ध घी का भोग लगाएं ।
द्धतिय दिन - माता ब्रहम्चारणी - शक्कर एवं फल का भोग
तृतिय दिन , - माता चंद्रघंटा दूध या गाय की दूध से बनी हुई खीर का भोग
चर्तुथी - माता कूष्मांड - माल पुआ
पंचमी - माता स्कंदमाता - केला का भोग लगाएं ।
षष्टी - माता कत्यानी - शहर का भोग लगाएं
सप्तमी - माता कालरात्रि गुड़ का भोग लगाएं
अष्टमी - माता महागौरी को नारियल चढ़ाएं
नौवमी - माता सिद्धीदात्रि - हलवा और पूड़ी का भोग लगाएं
ये नौ दिन नवरात्र में भोग लगाने की विधि जो नियम से पूजा करते है। घट स्थापना करते है। उनके लिए .
पूजा से पहले आसान पर बैठ जाएं और हाथ में जल अक्षत दूबा पुषप लेकर माता के सामने अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने के लिए या पूर्ण करने के लिए संकल्प करें
पूजा सम्पन्न हो जाने के बाद दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें यदि समय कम हो या आप पाठ नहीं कर पा रहें है। किसी वजह से तो
ॐ ऐं श्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै मंत्र का एक माला जाप करें पाठ करने के बाद पुनः आरती करें क्षमा याचना करें सरल भाषा में ।
दूर्गा सप्तसती का पाठ आरम्भ करने के पूर्व ये तीन अवश्य करें इनके बिना पाठ अधूरा होता है।
1, देवी कवच
सर्व प्रथम पाठ आरम्भ करने से पहले देवी कवच का पाठ किया जाता है। इस कवच का अर्थ होता है। ढाल , इस कवच के पाठ करने से देवी आपकी हर अंगों एवं दसों दिशाओं की रक्षा करती है। क्योंकि जब आप पाठ करने बैठते है। तो कोई बाहरी बाधा , मन विचलित , या नकरात्मक प्रभाव आपको विचलित ना कर सकें
2, अर्गला - अर्गला का पाठ करने का अर्थ होता है। कंडी या अवरोध हटाना , इस पाठ से रूप , जय , यश और शत्रुओं के नाश की प्रार्थना की गयी है। अर्थात् इस पाठ से शत्रुओं की नाश की प्रार्थना की जाती है। इसका प्रसिद्ध मंत्र है। रूप देहि , जयं देहि , यशो देहि , दिशों देहि ।
3, कीलक - कीलक का अर्थ है मंत्रों की शक्ति को खोलना या तेज करना प्रभाव में लाना ऐसा माना जाता है। शिव भगवान ने इस मंत्र को कीलीक कर दिया था। याने ( लाक ) कर दिया था। इस स्रोत का पाठ करने से आपको यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।
पाठ आरम्भ करने के पूर्व संक्षिप्त वर्णन
सर्वप्रथम गणोश जी की पूजा वंदन , उसके बाद कवच , अर्गला एवं कीलक , इसके बाद नवारण मंत्र एक माला करें वह मंत्र है।
ऊं ऐं श्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का जाप करें
यदि आप पाठ नहीं कर पा रहें तो ऐसी स्थिती में सिद्ध कुंजिका का पाठ करें आपको सम्पूर्ण सप्तसती का पाठ करने का सम्पूर्ण फल प्राप्त होगा ।
हवन समाग्री
कौन सा अन्न या वस्तु डालने से क्या होता है।
जाने ।
जवं - इसे शुद्धता का प्रतिक माना जाता है।
काली तिल - इसे हवन में डालने से सकारात्म ऊर्जा प्राप्त होती है।
अक्षत सफेद -
जो टूटा हुआ ना हो पूर्ण हो इसे सम्पन्नता का प्रतिक माना जाता है।
देशी धी -
अग्नि प्रज्जवलित करने के लिए गाय का घी
सुगन्धित और औषधि युक्त जड़ी बुटियां - वातावरण को सुंगधित एवं जीवाणु से मुक्त रखने के लिए
गूगल एवं लोभाग -
ये वातावरण को सुगन्धित हवा को शुद्ध करने के लिए
चंदन का चूरा -
शीतलता एवं उत्तम सुंगध के लिए
कपूर -
अग्नि को प्रज्जवलित एवं शुद्धि करण के लिए
मीठा और मेवा - देवताओं को भोग अपर्ण करने के लिए यह वस्तुएं डाली जाती है।
मिश्री या गुड़ -
मीठास के लिए
सूखा नारियल -
पूर्ण आहूति , पंचमेवा , काजू , बदाम , किशमिश , छोहारा , आदि भी डाले जाते है।
समिधा ( हवन की लकड़ी )
आम की लकड़ी -
आम की लकड़ी प्रत्येक पूजा पाठ में शुभ मानी जाती है।
पीपल - शमी -
ग्रहों की शांति के लिए
जव , तिल काला , चांवल को बराबर मात्रा में लेवें शुद्ध घी गाय का गर्म (गुनगुना ) करके मिलाने के लिए गूगल , लुभाग , आदि समाग्री को एक बड़े बर्तन में डाल कर अच्छी तरह मिला लेवें
नोट :- कई जगहों पर तिल जैसे 100, ग्राम रहता है। तो जव 50, ग्राम उसे कम 25, ग्राम चावल मिलाया जाता है। लेकिन हवन करने वालों की संख्या अधिक हो तो उसी क्रम में सामग्रियां मिलाएं
अग्नि प्रज्जवलित करने के लिए आम की लकड़ी एवं कपूर से ही करें
हवन - हवन जब हम करते है। तो हवन समाग्री अर्थात् साकला को अंगूठे और अनामिका अंगुली की मददत से ही आहुति डालें अर्थात् अग्नि में ही समर्पित करें
कुछ भूल हो गयी हो तो अपने बुर्जग एवं पडितों से पूछ लेवें
दिगपाल -
दस आम का पत्ता
दस आटे से बनी हुई दीपक गोठा हुआ डिजाईन किया हुआ बनाए सादा नहीं
दस घी में डूबी हुई बत्ती
थोड़ा उड़द दाल
थोड़ा एक या दो चम्मच दही
पूजा के लिए रोरी कुमकुम , गुलाल , घूप दीप आरती नैवेध
हवन में डालने के लिए छोटी छोटी पूड़ी एवं खीर बनाए पूड़ी 16, होनी चाहिए लक्ष्मी माता , देवी के लिए आहुति देते है। शेष बच् जाय तो जो हवन मैं बैठते है। वह प्रसाद् लेवें किसी अन्य को ना देवें
जोड़ा से बैठकर हवन करें गठ बंधन करके बैठे गठबंधन में चावल पीला , हल्दी खड़ी , सुपारी एक एक नग डालें दूबी पुष्प , एक रुपए का सिक्का डालें
जय माता की
पूजी की तैयारी आप सभी को पता ही है।
हवन समाग्री
लकड़ी 10,कि
शुद्ध घी 1, कि०
चावल 2,50, ग्राम
जौ 100, ग्राम
काली तिल्ली 150, ग्राम
सुगन्धित घूप 1, कि
अगर तगर की लकड़ी
नवग्रह लकड़ी
चंदन चुरा 5, रू का
गुड़ 100, ग्राम
शक्कर 50, ग्राम
पान का पत्ता 25
आम का पत्ता
उड़द दाल 10 रु
दही एक छोटा पैकेट
पांच प्रकार का फल
पांच प्रकार का मिठाई
जायफर पांच
ड्राई फूट मिक्स 1, पाव
फूल , फूल माला , दूबी , बेलपत्र
मौली धागा
दो जनेऊ कपूर घूप
दीप आरती
आशा ठाकुर अम्लेश्वर
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें