अनंत चतुर्दशी की कथा हाथ में फूल , अक्षत एवं जल ले कर कथा सुने प्राचीन काल में सुमंत नामक एक ब्राम्हण था। जिसकी पुत्री सुशीला थी। सुशीला का विवाह कौडिन्य ऋषि से हुआ । जब सुशीला की बिदाई हुई तो उसकी विमाता कर्कशा ने कौडिन्य ऋषि को ईट पत्थर दिया रास्ते में जाते समय नदी पड़ा वहा पर रुक कर कौडिन्य ऋषि स्नान कर संध्या कर रहे थे। तब सुशीला ने उन्हें अनंत चतुर्दशी की महिमा का महत्व बताया और 14, गांठ वाली धागा उनके हाथ पर बांध दी जिसे सुशीला ने नदी किनारे प्राप्त की थी। कौडिन्य ऋषि को लगा की उनकी पत्नी सुशीला उनके ऊपर जादू टोना हा कर दी है। वह उस धागे को तुरन्त निकाल कर अग्नि में जला दिया जिससे अनंत भगवान का अपमान हुआ । और क्रोध में आकर कौडिन्य ऋषि का सारा सुख समृद्धि , संपत्ति नष्ट कर दिए कौडिन्य ऋषि का मन विचलित हो गया परेशान हो गए और आचनक राज पाठ जाने का कारण अपने पत्नी से पूछा तब उनकी पत्नी उन्हें सारी बातें बतायी यह सुनकर कौडिन्य ऋषि पश्चाताप करने लगा और घने वन की ओर चल दिए । वन में भटकते भटकते उन्हें थकान एवं कमजोरी होने लगा और मूछित होकर जम...
*सत्यवान -सावित्री* आप सभी को वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं🙏 आज सभी ने सत्यवान सावित्री की कहानी कही सुनी,सागरिका पटल पर भी कहानी आशा भाभी द्वारा प्रस्तुत की गई। अब एक प्रश्न की सावित्री ने 3 वर ही क्यों माँगे?इन का रहस्य क्या हो सकता है? साथ ही वट सावित्री की कथा का रहस्य?? आप सभी विचार कीजिये🙏🙏 श्रीमती वंदना ठाकुर सादर प्रणाम मेरा व्यक्तिगत विचार है औरत चाहे सावित्री हो या अन्य कोई सत्य युग या कलयुग की जीवन भर सिर्फ तीन वरदान ही मांगती है मेरा मायके भरापूरा रहे । मेरे पतिदेव दीर्घायु रहे। मेरे घर परिवार बच्चे सुखी रहे। सिर्फ अपने लिये कुछ मांगना भूल जाती है तीजा हो खमरछठ सिर्फ परिवार की सलामती ।धन्य धन्य है महिलाओ का जिगर श्रीमती सलीला ठाकुर 🙏 श्रीमती कल्पना झा *सावित्री के द्वारा पति के प्राण के बदले यम राज के 3 वर का रहस्य* ज्योतिष शास्त्र और अध्यात्म ही भारतीय संस्कृति का आधार है । यही जीवन जीने की कला , ज...
श्री गणेशाय नमः या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण ' संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः जय माता दी 🙏🙏 आज मैं नवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर आपको नवरात्रि इस वर्ष कितने दिन की है। घट स्थापना का मूहर्त कब है। एवं किस दिन कौन सी देवी को क्या भोग लगना चाहिए एवं हवन समाग्री, उनके महत्व बताने की कोशिश कर रही हूँ । 19, मार्च से वसन्त नवरात्रि आरम्भ हो रही है ध्वजा रोहण , कलश स्थापना प्रातः काल6.52 मिनट से लेकर प्रातः काल7.43 मिनट में है। उसके बाद दोपहर अभिजीत मुहूर्त 12.5 मिनट से लेकर दोपहर 12.53 मिनट पर है। इस नवरात्र में तिथियों को लेकर कोई संशय नहीं है। प्रायः देखा जाता है। की आमतोर पर दो तिथियां एक ही दिन पड़ती हैं। तो नवरात्र आठ दिन का ही होता है। यदि तिथि बढ़ जाए तो ऐसे स्थिती में नवरात्र दस दिन का होता है। इस वर्ष 2026, में नवरात्र प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि सभी क्रम बद्ध है। इसलिए आपको माता की आराधना के लिए पूरे नौ दिन प्राप्त हो रहे हैं। जानते है नौ दिनों में तिथि एवं पूजा के साथ ही माता का स्वरूप दिन - तिथि - ...
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