श्री गणेशाय नमः
उपनयन समाग्री
चुनमाटी की तैयारी
सर्वप्रथम
गौरी गणेश , कलश दीया , बाती , आम पत्ता , जल , चंदन , फूल , दूबी , चांवल , आटा या पीसा हुआ चांवल का रेहन चौक डालने के लिए , अगबत्ती , माचिस , दीपक , नैवेध ये सब समाग्री सभी पूजा में लगेगा इसलिए बड़े परात में रख लेवें
चुलमाटी के समय ले जाने वाली समाग्री साबल , साबल में बांधने के लिए पीली चावल , हल्दी खड़ा + सिक्का एक रुपया पीला या लाल वस्त्र साबल में बाधने के लिए (रिबन जैसा लम्बा कटा हुआ लाल या पीला कपड़ा
चौक के लिए आटा , चंदन , रोरी कुमकुम गुलाल , दूबी फूल , अक्षत , घूप देने के लिए कंडा , गुड . घी , नैवेध कुछ सिक्के चढ़ाने के लिए यदि मंदिर हो तो वहां पर चढ़ाने के लिए नारियल + प्रसाद जहा पर जमीन खोदा जायेग वहा पर पूजा करने के लिए नारियल + जनेऊ पूजा की तैयारी
बुआ , फूफा , या जीजा + जीजी जो सुहासन बनेगी उसके लिए दोनों को वस्त्र , एवं आंचल में देने के लिए चांवल पीला + हल्दी खड़ी सुपाड़ी चुड़ी सिन्दूर कुछ रुपए या सिक्का देने के लिए
दस बांस की टोकनी मिट्टी लेने के लिए नवाइन उनको भी साड़ी दिया जाता है। सुहागन हो तो ओली भी भरा जाता है।
ये चुलमाटी का नेग
अब घर में
फूल गोड़ा चौक कलश + गौरी गणेश
लड़की की बैठने के लिए पाटा
पूजा की तैयारी
कटोरी में घीसा हुआ चंदन
फूल माला , आलता, बताशा + मूगफली लड़का को देने के लिए एवं उपस्थित सभी महिलाए बच्चे बुर्जगों को बाटने के लिए , पान का बीड़ा , आम का पत्ता चंदन चढ़ाने के लिए चंदन लड़का को दस बार चढ़ाते है। वैसे ही उतारते है। हल्दी चढ़ता है। उतरता नही है।
तेलमाटी
ढोलक की पूजा की जाती है। जो चुलमाटी की तैयारी रहती है। वही तैयारी को पुनः लेकर तेलमाटी के लिए ले जाया जाता है। तेल माटी में सुहासिन बदल दिया जाता है। वही सारा हल्दी का नेग चार पुरा करती है। इन्हें भी जोड़ी से वस्त्र , ओली नारियल सिक्का दिया जाता है। तेल माटी खोदने के समय गौरी गणेश + कलश की पूजा करने के बाद सबल से जल लोटा में तैयारी जो पहले की रहती है। उसे ही ले जाया जाता है। नवाइन
टोकनी ।
मण्डप में समाग्री
जो हम परात में रखें है। वही समाग्री
बटुक माता - पिता , आम , डूमर , पलाश , आदि का डंगाल मण्डप में डालने के लिए महुआ का डगाल , आम पत्ते का तोरन , मच्छर दानी का बांस चार नग ,मंगरोहन
मिट्टी का कलश ढक्कन सहित
2, टोटी वाला कलश
तेल मौरी रक्षा सूत्र एक बंडल , कैची , हल्दी 40, नग
खड़ी सुपाड़ी 40, नग दो दोना पीसी हल्दी + थोड़ा सा तेल
बटूक को तेल हल्दी के समय पहनाने वाला वस्त्र ( धोती )
लम्बी बाती जो हम ज्योत जलाते है। ठीक उसी तरह लगातार जलना चाहिए बुझना नही चाहिए ।
मोटी बाती
कलश में डालने के लिए पर्याप्त जल , नारियल
देव पितृ निमंत्रण : -
4, मिट्टी का बड़ा परई , आटा ,5, सुपाड़ी ,5, मिट्टी का ढेला ( पितर के लिए )
सफेद धागा , पीला धागा लपेटने के लिए
पूजा समाग्री + सफेद फूल एवं लाल फूल सफेद फूल पितर के लिए एवं लाल फूल कुल देवता के लिए
देवतेला :-
4, मंदिर में लेजाने वाली समाग्री
, नारियल , पीसी हल्दी चार दोना रुपया दक्षिणा कम से कम 51, रुपया कुल सिक्के चारों मंदिर में चढ़ाने के लिए
सेर सीधा
सेर सीधा के अन्तगत चांवल दाल आलु या इच्छा अनुसार हरी सब्जी नमक हल्दी
यदी सामर्थ हो तो किसी एक मंदिर में माता के लिए साड़ी एवं शृंगार समान वैसे यदि माता का चारों मंदिर हो तो कम से कम शृंगार का समान जरूर ले जाए
यह हो गया देव तेला का कार्य
मातृका पूजन :-
दीवार पर गोबर यदि आसान से मिल जाता है। तो सोलह मातृका बनाए नहीं तो आटा का कुछ इस प्रकार
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इस तरह प्रत्येक में दूबी और धान लगाए
ठीक नीचे मैं चौक बनाए उसके ऊपर पाटा रखें उसमें तांबे या कांसे का प्लेट रखें दाहिने ओर ठीक बाजू में गौरी गणेश एवं कलश रखें उसके बाद 7, पत्तल रखे प्रत्येक पत्ते के अंदर अंजली भर कर चांवल रखें दो जगह पर कुछ 14, होनी चाहिए प्रत्येक चांवल के ऊपर 14, अंजली रहेगा उसमें कटा हुआ नीबू, अदरक , एवं मटर रखें यदि मटर सूखा हो तो एक दिन पूर्व भीगा देवें 14, बीड़ा पान एवं जो सुहागन हो पितर हो चुके है। उनके लिए चुड़ी सिन्दूर रखें , जनेऊ 8,, आटे का दीया 16, बनाए , घी बात्ती16, नग
पूड़ी 60, + बड़ा उडद दाल का 60, बूंदी का लड्डु 60,
तिल का लड्डु 60,
जवा 2 o ग्राम , तिल काला 20, ग्राम , खाली दोना 10, पीला चांवल एक दोना एक कटोरी शुद्ध घी ( कांसे की कटोरी ) पूजा करने वाले के लिए एक नया घोती , नयी साड़ी , फल , मिनी मिठाई, नारियल एक सुपारी 20, चांवल 14, अंजली सफेद
नहदोड़ी: -
नहडोरी का चुकिया छोटा वाला 10, नग , पर्रा , एक बाल्टी पानी पाटा बैठने के लिए
जूटिका बन्धन : -
आधा कटोरी घीसा हुआ चंदन या पावडर, दही , पीला चांवल , फूल + दूबी + धागा एक मिटर , हरा आम का पत्ता
उपनय के समय लगने वाली समाग्री कुछ इस प्रकार :
एक जोड़ी बटूक की घोती दो का कर रहे हो तो दो के लिए इसी तरह आप जितने बच्चों का कर रहें है। संख्या उसी प्रकार होगी ।
भीख व सावित्री दान के लिए पीला कपड़ा सूती दो मीटर , कैची , जनेऊ 10, सुपारी 10, कांस की कटोरी तीन , तांबे का प्लेट या थाली मिख मांगने के लिए तीन रेत , गाय का गोबर , आम पत्ता , सांड का गोबर , कच्ची पूड़ी एक एवं नौ पक्की पूड़ी झालर झोकने के लिए बुआ की साड़ी , एक नग थैला
3, कि० हवन की लकड़ी , दही , मक्खन , सिक्का 10, दस ताम्रवात्र भीखवार के लिए ,10, सूपा , बेलन , ऐना , कंधी सिन्दूर , नाई के लिए घोती या पैट शर्ट का कपड़ा सामर्थ अनुसार देने के लिए आठ बर्तन ग्लास या लोटा कपड़ा , जनेऊ , सिक्का + चांवल सफेद जनेऊ आठ ब्राम्हण के लिए पलाश डंडा , एक बांस का डण्डा , अस्तूरा , टोपी, फेटा , कलगी बटूक का कपड़ा शृंगार समान धान + दूबी
मूसल + ऊखल , सूपा , मिट्टी , की लाल चुकिया कलश की जैसा , धान एक पाव , जवा एक पाव , उड़द दाल एक पाव , तिल एक पाव ताम्बे का छूरा या फिर चांदी का घूरा और कटोरी मुंडन के लिए सामर्थ के अनुसार आप रख सकते है। यह नाई का होता है। बच्चों के चलाने वाला तिपहिया गाड़ी (रथ ) की भी आवश्यकता होती है। ( छन्दोगियों में उक्ततिरिक्त समान लगता है। अन्त मैं ब्राम्हण का दक्षिणा एक सूपा जो बटुक का गुरु बनते है। उन्हें दिया जाता है। 10, प्रकार का पकवान बनाया जाता है। सूपा में रखने के लिए मां के द्वारा बटूक को सोने की अंगूठी दी जाती है। भिखवार के समय
कुछ छूट गया हो तो अपने बड़ो से पूछ कर समाग्री रख सकते है।
आशा ठाकुर अम्लेश्वर पाटन रोड कृष्णा पुरी अम्लेश्वर
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