सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सोलह संस्कार में शामिल उपनयन संस्कार -श्रीमती आशा ठाकुर अमलेश्वर

श्री गणेशाय नमः
उपनयन समाग्री 
चुनमाटी की तैयारी 

सर्वप्रथम 
गौरी गणेश , कलश दीया , बाती , आम पत्ता , जल , चंदन , फूल , दूबी , चांवल , आटा या पीसा हुआ चांवल का रेहन चौक डालने के लिए , अगबत्ती , माचिस , दीपक , नैवेध ये सब समाग्री सभी पूजा में लगेगा इसलिए बड़े परात में रख लेवें 
चुलमाटी के समय ले जाने वाली समाग्री  साबल , साबल में बांधने के लिए पीली चावल , हल्दी खड़ा + सिक्का एक रुपया पीला या लाल वस्त्र साबल में बाधने के लिए (रिबन जैसा लम्बा कटा हुआ लाल या पीला कपड़ा 
चौक के लिए आटा , चंदन , रोरी कुमकुम गुलाल , दूबी फूल , अक्षत , घूप देने के लिए कंडा , गुड . घी , नैवेध कुछ सिक्के चढ़ाने के लिए यदि मंदिर हो तो वहां पर चढ़ाने के लिए नारियल + प्रसाद जहा पर जमीन खोदा जायेग वहा पर पूजा करने के लिए नारियल + जनेऊ पूजा की तैयारी 
बुआ , फूफा , या जीजा + जीजी जो सुहासन बनेगी उसके लिए दोनों को वस्त्र , एवं आंचल में देने के लिए चांवल पीला + हल्दी खड़ी सुपाड़ी चुड़ी सिन्दूर कुछ रुपए या सिक्का देने के लिए 
दस बांस की टोकनी मिट्टी लेने के लिए नवाइन उनको भी साड़ी दिया जाता है। सुहागन हो तो ओली भी भरा जाता है। 
ये चुलमाटी का नेग 
अब घर में 
फूल गोड़ा चौक कलश + गौरी गणेश 
लड़की की बैठने के लिए पाटा 
पूजा की तैयारी 
कटोरी में घीसा हुआ चंदन 
फूल माला , आलता, बताशा + मूगफली लड़का को देने के लिए एवं उपस्थित सभी महिलाए बच्चे बुर्जगों को बाटने के लिए , पान का बीड़ा , आम का पत्ता चंदन चढ़ाने के लिए चंदन लड़का को दस बार चढ़ाते है। वैसे ही उतारते है। हल्दी चढ़ता है। उतरता नही है। 
तेलमाटी
ढोलक की पूजा की जाती है। जो चुलमाटी की तैयारी रहती है। वही तैयारी को पुनः लेकर तेलमाटी के लिए ले जाया जाता है। तेल माटी में सुहासिन बदल दिया जाता है। वही सारा हल्दी का नेग चार पुरा करती है। इन्हें भी जोड़ी से वस्त्र , ओली नारियल सिक्का दिया जाता है। तेल माटी खोदने के समय गौरी गणेश + कलश की पूजा करने के बाद सबल से जल लोटा में  तैयारी जो पहले की रहती है। उसे ही ले जाया जाता है। नवाइन 
टोकनी । 
मण्डप में समाग्री 
जो हम परात में रखें है। वही समाग्री 
बटुक माता - पिता , आम , डूमर , पलाश , आदि का डंगाल मण्डप में डालने के लिए महुआ का डगाल , आम पत्ते का तोरन , मच्छर दानी का बांस चार नग ,मंगरोहन 
मिट्टी का कलश ढक्कन सहित 
2, टोटी वाला कलश 
तेल मौरी रक्षा सूत्र एक बंडल , कैची , हल्दी 40, नग 
खड़ी सुपाड़ी 40, नग दो दोना पीसी हल्दी + थोड़ा सा तेल 
बटूक को तेल हल्दी के समय पहनाने वाला वस्त्र  ( धोती ) 
लम्बी बाती जो हम ज्योत जलाते है। ठीक उसी तरह लगातार जलना चाहिए बुझना नही चाहिए । 
मोटी बाती 
कलश में डालने के लिए पर्याप्त जल , नारियल 
देव पितृ निमंत्रण  : - 
4, मिट्टी का बड़ा परई , आटा ,5, सुपाड़ी ,5, मिट्टी का ढेला ( पितर के लिए ) 
सफेद धागा , पीला धागा लपेटने के लिए 
पूजा समाग्री + सफेद फूल एवं लाल फूल सफेद फूल पितर के लिए एवं लाल फूल कुल देवता के लिए 
देवतेला :- 
4, मंदिर में लेजाने वाली समाग्री 
, नारियल , पीसी हल्दी चार दोना रुपया दक्षिणा कम से कम 51, रुपया कुल सिक्के चारों मंदिर में चढ़ाने के लिए 
सेर सीधा 
सेर सीधा के अन्तगत चांवल दाल आलु या इच्छा अनुसार हरी सब्जी नमक हल्दी 
यदी सामर्थ हो तो किसी एक मंदिर में माता के लिए साड़ी एवं शृंगार समान वैसे यदि माता का चारों मंदिर हो तो कम से कम शृंगार का समान जरूर ले जाए 
यह हो गया देव तेला का कार्य 
मातृका पूजन :- 
दीवार पर गोबर यदि आसान से मिल जाता है। तो सोलह मातृका बनाए नहीं तो आटा का कुछ इस प्रकार 
०० 
०० 
०० 
 ००  
०० 
०० 
००  
००  
इस तरह प्रत्येक में दूबी और धान लगाए 
ठीक नीचे मैं चौक बनाए उसके ऊपर पाटा रखें उसमें तांबे या कांसे का प्लेट रखें दाहिने ओर ठीक बाजू में गौरी गणेश एवं कलश रखें उसके बाद 7, पत्तल रखे प्रत्येक पत्ते के अंदर अंजली भर कर चांवल रखें दो जगह पर कुछ 14, होनी चाहिए प्रत्येक चांवल के ऊपर 14, अंजली रहेगा उसमें कटा हुआ नीबू, अदरक , एवं मटर रखें यदि मटर सूखा हो तो एक दिन पूर्व भीगा देवें 14, बीड़ा पान एवं जो सुहागन हो पितर हो चुके है। उनके लिए चुड़ी सिन्दूर रखें , जनेऊ 8,, आटे का दीया 16, बनाए , घी बात्ती16, नग 
पूड़ी 60, + बड़ा उडद दाल का 60, बूंदी का लड्डु 60,
तिल का लड्डु 60,
जवा 2 o ग्राम , तिल काला 20, ग्राम , खाली दोना 10, पीला चांवल एक दोना एक कटोरी शुद्ध घी ( कांसे की कटोरी ) पूजा करने वाले के लिए एक नया घोती , नयी साड़ी , फल , मिनी मिठाई, नारियल एक सुपारी 20, चांवल 14, अंजली सफेद 
नहदोड़ी: - 
नहडोरी का चुकिया छोटा वाला 10, नग  , पर्रा , एक बाल्टी पानी पाटा बैठने के लिए 
जूटिका बन्धन : - 
आधा कटोरी घीसा हुआ चंदन या पावडर, दही , पीला चांवल , फूल + दूबी + धागा एक मिटर , हरा आम का पत्ता 
उपनय के समय लगने वाली समाग्री कुछ इस प्रकार : 
एक जोड़ी बटूक की घोती दो का कर रहे हो तो दो के लिए इसी तरह आप जितने बच्चों का कर रहें है। संख्या उसी प्रकार होगी । 
भीख व सावित्री दान के लिए पीला कपड़ा सूती दो मीटर , कैची , जनेऊ 10, सुपारी 10, कांस की कटोरी तीन , तांबे का प्लेट या थाली मिख मांगने के लिए तीन रेत , गाय का गोबर , आम पत्ता , सांड का गोबर , कच्ची पूड़ी एक एवं नौ पक्की पूड़ी झालर झोकने के लिए बुआ की साड़ी , एक नग थैला 
3, कि० हवन की लकड़ी , दही ,   मक्खन , सिक्का 10, दस ताम्रवात्र भीखवार के लिए ,10, सूपा , बेलन , ऐना , कंधी सिन्दूर , नाई के लिए घोती या पैट शर्ट का कपड़ा सामर्थ अनुसार देने के लिए आठ बर्तन ग्लास या लोटा कपड़ा , जनेऊ , सिक्का + चांवल सफेद जनेऊ आठ ब्राम्हण के लिए   पलाश डंडा , एक बांस का डण्डा , अस्तूरा , टोपी, फेटा , कलगी बटूक का कपड़ा शृंगार समान धान + दूबी 
मूसल + ऊखल , सूपा , मिट्टी , की लाल चुकिया कलश की जैसा , धान एक पाव , जवा एक पाव , उड़द दाल एक पाव , तिल एक पाव ताम्बे का छूरा या फिर चांदी का घूरा और कटोरी मुंडन के लिए सामर्थ के अनुसार आप रख सकते है। यह नाई का होता है। बच्चों के चलाने वाला तिपहिया गाड़ी (रथ ) की भी आवश्यकता होती है। ( छन्दोगियों में उक्ततिरिक्त समान लगता है। अन्त मैं ब्राम्हण का दक्षिणा एक सूपा जो बटुक का गुरु बनते है। उन्हें दिया जाता है। 10, प्रकार का पकवान बनाया जाता है। सूपा में रखने के लिए मां के द्वारा बटूक को सोने की अंगूठी दी जाती है। भिखवार के समय 
कुछ छूट गया हो तो अपने बड़ो से पूछ कर समाग्री रख सकते है। 
आशा ठाकुर अम्लेश्वर पाटन रोड कृष्णा पुरी अम्लेश्वर 
🙏🙏

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मधुश्रावणी व्रत २०२३ - सागरिका महिला मंच

श्री महालक्ष्मी व्रत कथा🪷🪷 एक समय महर्षि द्पायन व्यास जी हस्तिनापुर आए उनका आगमन सुनकर राजरानी गांधारी सहित माता कुंती ने उनका स्वागत किया अर्द्ध पाद्य आगमन से सेवा कर व्यास जी के स्वस्थ चित् होने पर राजरानी गांधारी ने माता कुंती सहित हाथ जोड़कर व्यास जी से कहा, है महात्मा हमें कोई ऐसा उत्तम व्रत अथवा पूजन बताइए जिससे हमारी राजलक्ष्मी सदा स्थिर होकर सुख प्रदान करें, गांधारी जी की बात सुनकर व्यास जी ने कहा, हे देवी मैं आपको एक ऐसा उत्तम व्रत बतलाता हूं जिससे आपकी राजलक्ष्मी पुत्र पौत्र आदि सुख संपन्न रहेंगे। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को स्नान आदि से निवृत हो शुद्ध वस्त्र धारण कर महालक्ष्मी जी को ताजी दूर्वा से जल का तर्पण देकर प्रणाम करें, प्रतिदिन 16 दुर्वा की गांठ, और श्वेत पुष्प चढ़कर पूजन करें, १६धागों का एक गंडां बनाकर रखें पूजन के पश्चात प्रतिदिन एक गांठ लगानी चाहिए, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को माटी के हाथी पर लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित कर विधिवत पूजन करें ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देकर संतुष्ट करें इस प्रकार पूजन करने से आपकी राजलक्ष्मी पुत्र पौत्र...

*सागरिका की पवित्र सरिता माँ महानदी पूजा अनुष्ठान विधा - संयोजिका श्रीमती आशा ठाकुर, श्रीमती भावना ठाकुर, श्रीमती सपना ठाकुर श्रीमती रक्षा झा एवं सखियां.श्री गणेशाय नमः आज दिनांक 30,8,25 अगस्त दिन शनिवार मैं संतान साते की पूजा विधि बताने जा रही हूँ यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में संतान की दीघार्यु एव स्वस्थ होने की कामना करते हुए किया जाता है। जिनकी संतान नही होती वह भी यह व्रत नियम विधि के अनुसार करें तो अवश्य ही संतान की प्राप्ति होती है। प्रात : काल उठ कर स्नान करेंसारा घर का काम निपटा कर पूजा करने की जगह को साफ कर लेवें गंगा जल से शुद्धि करन करके जहा हमें पूजा करनी है। वहा पर सीता चौक डाले कलश के लिए फूल गौड़ा चौक रेहन अर्थात् चावल की आटा का घोल बनाए उससे चौक पूरे और चौक में सिन्दूर लगाए शंकर पार्वती उनके परिवार की स्थापना के लिए चौकी या पाटा रखें उसके ऊपर लाला या पीला कपड़ा बिछाए प्रतिमा या फोटों या फिर मिट्टी से शिव शंकर पार्वती एवं परिवार की मूर्ति बनाकर स्थापना करें पूजा की तैयारी : - परात में चंदन रोरी कुमकुम , फूल फुल माला , बेल पत्ती , दूबी अक्षत , काला तिल , जनेऊ , नारियल , शृंगार का समान वस्त्र कपूर , धूप, दीप आरती बैठने के लिए आसन गौरी गणेश कलश अमा का पत्ता लगा हुआ नैवेध फल नैवेध :- मीठा पूड़ी का भोग लगता है। उपवास : - संतान साते के दिन दिन भर उपवास रहते है। और पूजा करने के बाद मीठा पुड़ी ( पुआ ) खा कर व्रत तोड़ते है। इसके अलावा कुछ भी नही लेते जूस , चाय नीबू पानी पी सकते है। क्योंकि आज कल शुगर , बी पी की शिकायत रहती है। तो आप ले सकते है। अन्न नहीं लेते है। पूजा विधि शाम के समय गोधुली बेला में शिव पार्वती एवं उनकी परिवार की पूजा की जाती है। अच्छे से तैयार होकर सोलह शृंगार करके यह व्रत की जाती है। सर्व प्रथम गौरी गणेश कलश की पूजा उसके बाद गौर साठ की पूजा क्योंकि हम मैथिल ब्राम्हण है। तो हमारे यहा पर हर त्यौहार पर गौर साठ की पूजा की जाती है। उसी के बाद ही अन्य पूजा यह नियम महिलाओं के लिए ही है। गौर साठ पूजा के बाद शंकर पार्वती की पूजा जल से स्नान दूबी या फूल लेकर करें , फिर चंदन , रोरी कुमकुम लगाए पुष्प चढ़ाए , माला पहनाए संतान साते में सात गठान की मौली धागा से चूड़ा बनाए या जो सामर्थ है। वह सोने की कंगन या चांदी का कंगन बनाए एवं दूबी सात गाठ करके चढ़ाए कंगन की पूजा करें भोग मीठा पुड़ी लगाए जितना संतान रहता है। उनके नाम से सात पुआ गौरी शंकर एवं सात पुआ संतान के नाम से एक भाग ब्राम्हण को दान करें एवं परिवार को बांटे एक भाग जो सात पुआ है। उसे स्वय ग्रहण करें कंगन पहन कर ही प्रसाद को ग्रहण करें आरती : - पहले गणेश जी का करें फिर शंकर जी का दक्षिणा सामर्थ अनुसार संकल्प करें आशा ठाकुर अम्लेश्वर 🙏🙏.. श्री गणेशाय नमः ,,श्री गणेशाय नमः सधौरी की विधि यह विधि नौवा महीने में किया जाता है। पंडित जी से शुभ मुर्हुत पूछकर किया जाता है। सबसे पहले सिर में बेसन डालने का विधि होता है। पांच या नौ सुहागन के द्वारा सिर पर बेसन डाला जाता है। और चूकिया से जल सिर के ऊपर डाला जाता है। उसके लिए नव चूकिया चाहिए होता है। बेसन मुहूर्त के हिसाब से ही डाला जाता है। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए नहाने से पहले आंचल में हलदी + सुपारी + चांवल + सिक्का डालना चाहिए चावल का घोल से हाथ देते हुए उसमें सिन्दूर , पुषप दुबी डालें प्रत्येक हाथा में वघू या कन्या के द्वारा जहा पर बेसन डाला जायेगा वहां पर फूल गौड़ा चौक डाले चौकी या पाटा रखें फिर बेसन डालें और जल भी सिर के ऊपर डालें कम से कम पांच या सात बार सभी सुहागनियों के द्वारा उसके उपरान्त स्नान अच्छी तरह करने दो गिला कपड़ा पहने रहें किसी छोटी बच्ची या बच्चा जो सुन्दर हो चंचल हो उसके हाथ से शंख में कच्चा दूध और पुष्प डाल कर भेजे बालक और बालिका को अच्छी तरह से देख र्ले उनसे शंख और दूध लेकर भगवान सूर्य नारायण को अर्ध्य देवें इधर उधर किसी भी को ना देखें सूर्य नारायण को प्रणाम करें पूजा रूम में प्रवेश करें बाल मुंकुद को प्रणाम करें कपड़ा नया वस्त्र धारण करें शृंगार करें आलता लगाए पति पत्नी दोनों गंठ बंधन करके पूजा की जगह पर बैठ जायें पूजा जैसे हम करतेप्रकार करे आरती करें भोग लगाए तन्त् पश्चात् जो परात में आम का पत्ता के ऊपर दिया रखें दिया में चावल के घोल से . + बनाये सिन्दूर लगाए हल्दी सुपाड़ी सिक्का चुड़ी दो रखें प्रत्येक दिये में सिन्दूर की पुड़िया रखें गुझिया रखें उसे भोग लगा कर पूजा के बाद प्रत्येक सुहागिनों को आंचल से करके उनके आचल में दें । फिर पूजा स्थल पर कुश बढ़ाओं चौक डाले पाटा रखें उसके ऊपर गाय + बैल + कहुआ को गोत्र के अनुसार रखें बैले हो तो घोती आढ़ऐ गाय हो तो साड़ी पूजा के बाद कांसे के थाली में बनी हुई समाग्री को पांच कौर शहद डाल कर सास या मां के द्वारा पांच कौर खिलाए उसके पहले ओली में पांच प्रकार का खाद्य समाग्री डाले जैसे गुझिया अनारस फल मेवा डालें और छोटे बच्चे के हाथ से निकलवाए हास्य होता है। थोड़ी देर के लिए गुझिया निकला तो लड़का प प्ची निकला तो लड़की फिर सभी सुहागिनी यों को भोजन करवाए आशा ठाकुर अम्लेश्वर 🙏🙏ज्युतिया ,,यह त्यौहार क्वांर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी को अपने बच्चे की दीर्घायु , तेजस्वी , और स्वस्थ होने की कामना करते हुए माताएं इस दिन निर्जला व्रत करती है।विधि ज्युतिया के पहले दिन किचन शाम को साफ सुथरा कर पितरों के लिए भोजन बनाया जाता है। शाम को तरोई या कुम्हड़ा के पत्ते पर पितराईन को दिया जाता है। उसके पहले चिल , सियारिन , जुट वाहन , कपूर बती , सुहाग बती , पाखर का झाड़ , को सभी चींजे खाने का बना हुआ रहता है। फल मिठाई दूध , दही , घी शक्कर मिला कर (मिक्स ) करके ओडगन दिया जाता है। तत् पश्चात जो इस दुनिया में नही है। उन पितराईन के नाम लेकर उस पत्ते पर रख कर उन्हें दिया जाता है। नाम लेकर *दूसरे दिन*सुबह स्नान कर प्रसाद बनाए अठवाई , बिना नमक का बड़ा शाम के समय पूजा करें *पूजा की तैयारी* चंदन , रोरी कुमकुम गुलाल , फूल , दूबी , अक्षत , तिल , कपूर आरती , घूप दीप भीगा मटर , खीरा या फिर केला ज्युतिया लपेटने के लिए गौर साठ का डिब्बा गौरी गणेश कलश चौक पूरे , गौरी गणेश कलश और ज्यूत वाहन पूजा के लिए पाटा रखें उसके उपर रेहन से पोता हुआ ग्लास उसमें भीगा हुआ मटर डाले खीरा या ककड़ी जो उपलब्ध हो उसमें आठ गठान आठ जगह पर बनी हुई ज्यूतीया लपेटे पूजा करें विधि वत हर पूजा करते है। ठीक उसी तरह आरती करें प्रसाद भोग लगाए *तीसरे दिन* सुबह स्नान कर भोजन बनाएं पिताराईन को जो चढ़ा हुआ प्रसाद रहता है। और ग्लास का मटर पहले पितराईन को ओडगन देवें पत्ते में रखकर और भोजन साथ साथ में देवें एक ज्यतिया दान करें ब्रम्हण के यहां सीधा , दक्षिणा रखकर दूसरा स्वयं पहने आस पास ब्राम्हण ना हो तो आप मंदिर में दान कर सकते है। *पूजा के पूर्व संकल्प करें*मासे मासे क्वांर मासे कृष्ण पक्षे अष्टमी तिथि मम अपना नाम एवं गौत्र कहे और यह कहे सौभाग्यादि , समृद्धि हेतवे जीवीत पुत्रिका व्रतोपवासं तत्तपूजाच यथा विधि करिश्ये । कहकर फूल चढ़ाए प्रार्थना कर पूजा आरम्भ करें पूजा विधि सभी राज्यों में अपने अपने क्षेत्रों के अनुसार करें जिनके यहां जैसा चलता है परम्परा अपने कुल के नियम के अनुसार करें यूपी में बिहार में शाम को नदी , सरोव एवं तलाबों बावली के जगह पर जा कर वही चिडचीड़ा दातून से ब्रश कर वही स्नानकर वही पूजा करते है। सभी महिला एक साथ मिलकर करती है। उन्ही में से एक महिला कथा सुनाती है। वहां पर जीउतिया उनका सोना या चांदी का बना लहसुन आकृति का रहता है। हर साल जीउतिया सोनार के यहा जा कर बढ़ाते है। उसी जीउतिया को हाथ में रख कथा कहती है। और हर महिला के बच्चों का नाम लेकर आर्शीवाद देती है। ये उनका अपना रिति है। परन्तु हमारे छत्तीसगढ़ में और हम अपने घर पर जिस तरह पूजा पाठ करते हुए देखा है। उसे ही हम आप सबके बीच प्रस्तुत किया है। त्रुटि हो तो क्षमा प्रार्थी आपका अपना आशा ठाकुर अम्लेश्वर पाटन रोड छत्तीसगढ़ रायपुर 🙏🙏श्री गणेशाय नमः सधौरी की तैयारी गौरी गणेश + कलश चंदन रोरी कुमकुम घूप दीप कपूर अगरबत्ती नारियल भोग गौर साठ का डिब्बा रेहन चावल का पीसा हुआ हाथा देने के लिए एवं थाली कांसे की थाली मेवा काजू किशमिश बादाम छुहारा आदि ड्राई फूड मौसम अनुसार फल 60,आम का पत्ता मिट्टी का दिया 60 , चुड़ी सिन्दूर खड़ी हल्दी , खड़ी सुपारी 60 हल्दी 60 सुपारी जनेऊ बेसन शंख पाटा , पान का बिड़ा शहद नया वस्त्र पहने के लिए गोत्र के अनुसा मिट्टी का बैल , गाय , कछुआ जैसा हो गोत्र उसके अनुसार बनाना ओली में डालने के लिए पिली चांवल हल्दी सुपारी रुपया या सिक्का सुहागिनों को भी ओली डालने के लिए 60 गुझिया , अनरसा , दहरोरी मिठाई खोये का बना हुआ पूजा के लिए पाटा या चौकी , बैठने के लिए पाटा गठबंधन के लिए घोती गठबंधन करने के लिए थोड़ी सी पीली चांवल एक हल्दी एक सुपारी एक रुपय का सिक्का फूल दूबी डालना और गठबधन करना है। दूबी फूल फूल माला दूबी गौरी गणोश को चढ़ाने के लिए अर्थात् गणेश जी को चढ़ाने के लिए दमाद ,या बेटा के पहने के लिए जनेऊ बहू या बेटी के लिए सोलह शृंगार गजरा आदि कांसे की थाली में भोजन फल , मेवा शहद रखने के लिए

अनंत चतुर्दशी की कथा  हाथ में फूल , अक्षत एवं जल ले कर कथा सुने  प्राचीन काल में सुमंत नामक एक ब्राम्हण था। जिसकी पुत्री सुशीला थी। सुशीला का विवाह कौडिन्य ऋषि से हुआ ।  जब सुशीला की बिदाई हुई तो उसकी विमाता कर्कशा ने कौडिन्य ऋषि को ईट पत्थर दिया रास्ते में जाते समय नदी पड़ा वहा पर रुक कर कौडिन्य ऋषि स्नान कर संध्या कर रहे थे। तब सुशीला ने उन्हें अनंत  चतुर्दशी की महिमा का महत्व बताया और 14, गांठ वाली  धागा उनके हाथ पर बांध दी जिसे सुशीला ने नदी किनारे प्राप्त की थी।  कौडिन्य ऋषि को लगा की उनकी पत्नी सुशीला उनके ऊपर जादू टोना हा कर दी है। वह उस धागे को तुरन्त निकाल कर अग्नि में जला दिया जिससे अनंत भगवान का अपमान हुआ । और क्रोध में आकर कौडिन्य ऋषि का सारा सुख समृद्धि , संपत्ति नष्ट कर दिए   कौडिन्य ऋषि का मन विचलित हो गया परेशान हो गए और आचनक राज पाठ जाने का कारण अपने पत्नी से पूछा तब उनकी पत्नी उन्हें सारी बातें बतायी यह सुनकर कौडिन्य ऋषि पश्चाताप करने लगा और घने वन की ओर चल दिए । वन में भटकते भटकते उन्हें थकान एवं कमजोरी होने लगा और मूछित होकर जम...

छत्तीसगढ़ मैथिल ब्राह्मण विवाह पद्धति आशा ठाकुर

चुनमाट्टी की तैयारी सर्व प्रथम घर के अंदर हाल या रूम के अंदर फूल गौड़ा चौक बनाए सिन्दूर टिक देवें उसके ऊपर सील बट्टा रखें उसमें हल्दी खडी डाले खल बट्टा में चना डाले सर्व प्रथम मां गौरी गणेश की पूजा करें उसके बाद सुहासीन के द्वारा हल्दी और चना कुटे सबसे पहले जीतने सुहागिन रहते है उन्हों ओली में चावल हल्दी सुपाड़ी डाले सिन्दूर लगाये गुड और चावल देवें और हल्दी और चना को पीसे सील के चारों तरफ पान का पत्ता रखें हल्दी सुपाड़ी डालें पान का सात पत्ता रखें पूजा की तैयारी गौरी गणेश की पूजा चंदन ,, रोरी '' कुमकुम '' गुलाल जनेऊ नारियल चढ़ाए फूल या फूल माला चढ़ाए दूबी . भोग अरती घूप अगर बत्ती वस्त्र मौली घागा वस्त्र के रूप में चढ़ा सकते है ये घर की अंदर की पूजा विधि चुलमाट्टी जाने के पहले की है। बहार जाने के लिए तैयारी सात बांस की टोकनी टोकनी को आलता लगा कर रंग दीजिए उसके अंदर हल्दी . सुपाड़ी खडी एक एक डाले थोड़ा सा अक्षत डाल देवें सब्बल '' या कुदारी जो आसानी से प्राप्त हो ,, सब्बल में या कुदारी में पीला कपड़ा के अंदर सुपाड़ी हल्दी और थोड़ा सा पीला चावल बाधे किसी देव स्थल के...